कृष्णचन्द्र गांधी पुरस्कार वर्ष 2007 से निरंतर पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति द्वारा जनजातीय अनुपम सेवायें प्रदान करने वाले एवं पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति के मुख्य उद्देश्य शिक्षादान को मूर्त रूप प्रदान करने व करवाने वाले कार्यकर्ता अथवा संस्था को प्रदान किया जाता है। स्वर्गीय कृष्णचन्द्र गांधी जी के व्यापक विचार, अथक मेहनत एवं लगन के परिणाम स्वरूप विद्या भारती के प्रथम विद्यालय की स्थापना हुई। स्वर्गीय गाँधी जी ने पूर्वोत्तर भारत के जनजाति समाज व वन अंचलो में शिक्षा का प्रचार-प्रसार तीव्र गति से बढ़े, इसके लिए कई योजनाएँ बनाई। इन्हें मूर्त रूप प्रदान करवाने के लिए जीवन के महत्वपूर्ण 25 वर्ष पूर्वोत्तर में कई बार भ्रमण किया। जनमानस को शिक्षा दान के लिए प्रेरित कर कार्यकर्ताओं व दानदाताओं को जोड़ा। पूर्वोत्तर में विभिन्न प्रांतीय समितियों के माथ्यम से जनजाति क्षेत्र में 87 औचपारिक विद्यालय व 540 एकल विद्यालय के माध्यम से लगभग 34,000 विद्यार्थी प्रतिवर्ष शिक्षा के माध्यम से लाभान्वित हो रहे हैं विभिन्न प्रांत समितियों द्वारा जनजाति क्षेत्र में संचालित विद्यालयों को पूर्वोत्तर जनजाति शिक्षा समिति द्वारा सहयोग प्रदान किया जाता है स्वर्गीय कृष्णचन्द्र गांधी जी के नाम से अलंकृत यह पुरस्कार कार्यकर्ता का सर्वोच्च सम्मान है. एवं अन्य कार्यकर्ताओं को प्रेरणा के साथ साथ ऊर्जा प्रदान करने वाला है।

वर्ष 2007 से प्रारम्भ होकर 2019 तक 13 श्रेष्ठ सामाजिक कार्यकर्ताओं को यह पुरस्कार प्रदान किया गया है।
  • 2007- श्री न्याग पायेंग, (अरुणाचल प्रदेश)
  • 2008- श्री लून्से टिमुंग, कार्बी आंगलोंग (असम)
  • 2009- श्री तुलेश्वर नार्जरी, कोकराझार (असम)
  • 2010- श्रीमती ड्रिम्सिरन खारकंग गोरे (मेघालय)
  • 2011- श्री अर्नब हाजोंग, पश्चिम गारो पहाड़ (मेघालय)
  • 2012- श्री प्रवेश चंद्र धर, (त्रिपुरा)
  • 2013- श्री पाउतेम्जन न्यूमे, हाफलोंग, (असम)
  • 2014- श्रीमती करबीलता देउरी, (असम)
  • 2015- श्री मनेश्वर देउरी, (असम)
  • 2016- श्रीमती हिगियो अरुनी, (अरुणाचल)
  • 2017- श्रीमती फली बोडो, माईबोंग, (असम)
  • 2018- डॉ उपेन राभा हकाचम, गुवाहाटी, (असम)
  • 2019- श्री श्री चित्तरंजन देवबर्मा, अगरतला, त्रिपुरा

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